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1 सफ़र 1448
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लखनऊ

लखनऊ, Uttar Pradesh में नमाज़ के समय

16 जुलाई 20261 सफ़र, 1448
अगली नमाज़
फ़ज्र
03:55 am
01:35:08
सूर्योदय
05:22 am
ज़ुहर
12:12 pm
अस्र
03:41 pm
मगरिब
07:21 pm
इशा
08:10 pm

⚠ तेहरान विश्वविद्यालय — भू-भौतिकी संस्थान दिखा रहा है — इस स्थान का डिफ़ॉल्ट नहीं यूनिवर्सिटी ऑफ़ इस्लामिक साइंसेज़, कराची. डिफ़ॉल्ट पर रीसेट

गणना विधि बदलें

अलग विधि से समय देखें। भारत का डिफ़ॉल्ट है यूनिवर्सिटी ऑफ़ इस्लामिक साइंसेज़, कराची.

अतिरिक्त समय

इम्साक
03:45
आधी रात
23:29
क़ियाम-उल-लैल
00:57
रात का अंतिम तिहाई
क़िबला
क़िबला दिशा: उत्तर से 270.8° (लगभग प)। मक्का तक 4,195 किमी।
आज रात चाँद देखनानंगी आँख से आसानी से दृश्य

लखनऊ, Uttar Pradesh भारत के सटीक नमाज़ के समय

लखनऊ, Uttar Pradesh, भारत में सटीक नमाज़ के समय प्राप्त करें, तेहरान विश्वविद्यालय — भू-भौतिकी संस्थान विधि से अस्र के लिए मानक (शाफ़ी, हंबली, मालिकी) फ़िक़्ही गणना के साथ। आज फ़ज्र 03:55 पर शुरू होता है और इशा 20:10 पर। फ़ज्र से मगरिब तक रोज़े की अवधि 15 घंटे 26 मिनट है।

टाइमज़ोन और निर्देशांक

लखनऊ Asia/Kolkata टाइमज़ोन (UTC +05:30) में स्थित है, अक्षांश 26.8500 और देशांतर 80.9167 पर। eSalah डेलाइट सेविंग टाइम के लिए स्वचालित रूप से समायोजित करता है।

🌒 लखनऊ में आज रात चांद

पूरा विवरण →
कला
बढ़ता अर्धचंद्र (8% रोशन)
सूर्योदय
05:23 am
सूर्यास्त
07:02 pm
चंद्रोदय
07:13 am
चंद्रास्त
08:44 pm
सूर्यास्त के बाद चांद के डूबने का अंतराल +1 घं 43 मि

सूर्यास्त के बाद चांद कितनी देर क्षितिज पर रहता है — नए हिजरी महीने की पूर्व-संध्या पर अर्धचंद्र दिखने का मुख्य संकेत।

🔭 सूर्यास्त पर आकाश — कहाँ देखें

10°20°30°SWWSWWWNWNWNNWNसूर्यचांद21° अज़ीमथ (क्षितिज पर कम्पास दिशा)

सूर्यास्त पर W दिशा की ओर मुख करें। अर्धचंद्र पश्चिमी क्षितिज के ऊपर चिह्नित ऊंचाई पर दिखेगा।

🧭 कहाँ देखें W · 21.2°

सूर्यास्त पर W की ओर देखें (अज़ीमथ 275°)। चांद डूबते सूरज के बाईं ओर ~19° होगा, क्षितिज से 21.2° ऊपर।

चाँद की आयु
2.5 दिन
सूर्य-चंद्र दूरांश
33.7°

लखनऊ अठारहवीं शताब्दी के मध्य से 1856 तक अवध के नवाबों की राजधानी के रूप में फला-फूला, जब ब्रिटिश विलय ने इसकी स्वतंत्र सत्ता समाप्त की; यह नगर दक्षिण एशियाई इसना अशरी शिया मुस्लिम संस्कृति का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। 1784 में आसफ़-उद-दौला द्वारा अकाल राहत निर्माण परियोजना के रूप में निर्मित बड़ा इमामबाड़ा बिना सहायक शहतीरों के विश्व के सबसे बड़े मेहराबदार हॉलों में से एक है और मुहर्रम पालन का एक प्रमुख केंद्रबिंदु है। लखनऊ की जामा मस्जिद और आसिफ़ी मस्जिद इसकी प्रमुख सुन्नी मस्जिदें हैं। नगर अपनी परिष्कृत उर्दू शायरी के लिए भी प्रसिद्ध है, विशेषकर मीर अनीस और मिर्ज़ा दबीर की मर्सिया-एलेजियाँ, जो मुहर्रम की साहित्यिक परंपरा का अंग बनी हुई हैं। आज लखनऊ भारत के सबसे विस्तृत मुहर्रम जुलूसों में से एक का आयोजन करता है।